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पटना में CNG की कीमत 2 रुपये बढ़ी, नई दर 92.90 रुपये प्रति किलो, ऑटो-टैक्सी संचालन पर बड़ा असर

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पटना में CNG की कीमत में 2 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी के बाद नई दर 92.90 रुपये हो गई है। GAIL के इस फैसले से ऑटो-टैक्सी चालकों और आम यात्रियों पर सीधा आर्थिक असर पड़ेगा।

पटना/आलम की खबर:पटना में एक बार फिर ईंधन महंगाई ने आम लोगों और वाहन चालकों की परेशानी बढ़ा दी है। राजधानी में CNG की कीमत में 2 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी की गई है, जिसके बाद नई दर 92.90 रुपये प्रति किलो हो गई है। यह बदलाव गैस आपूर्ति करने वाली कंपनी GAIL (India) Limited की ओर से किया गया है और नई दरें तत्काल प्रभाव से पूरे शहर के सभी CNG पंपों पर लागू कर दी गई हैं। इस निर्णय के बाद पटना में चलने वाले हजारों ऑटो, टैक्सी और निजी सीएनजी वाहनों की परिचालन लागत पर सीधा असर पड़ना तय माना जा रहा है।

पटना जैसे बड़े और तेजी से बढ़ते शहर में CNG परिवहन व्यवस्था की रीढ़ बन चुकी है। ऑटो रिक्शा, ई-ऑटो के साथ-साथ कई निजी कैब और वाणिज्यिक वाहन इसी ईंधन पर निर्भर हैं। ऐसे में जब भी CNG की कीमतों में बदलाव होता है, उसका प्रभाव सीधे आम जनता की जेब तक पहुंचता है। इस बार हुई बढ़ोतरी ने एक बार फिर वाहन चालकों की चिंता बढ़ा दी है क्योंकि पहले से ही डीजल, पेट्रोल और अन्य रखरखाव खर्चों में वृद्धि के कारण उनका मुनाफा लगातार घट रहा था।

जानकारी के अनुसार GAIL ने यह संशोधन आपूर्ति लागत, परिवहन खर्च और बाजार में गैस की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए किया है। पंप संचालकों ने भी पुष्टि की है कि नई दरें तुरंत प्रभाव से लागू कर दी गई हैं और अब उपभोक्ताओं से 92.90 रुपये प्रति किलो की दर से CNG वसूली जा रही है। यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब देश के कई हिस्सों में ईंधन कीमतों में उतार-चढ़ाव का दौर जारी है और आम जनता पहले से ही महंगाई के दबाव में है।

पटना में बड़ी संख्या में लोग रोजाना ऑटो और टैक्सी पर निर्भर रहते हैं। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, अस्पताल और बाजारों तक पहुंचने के लिए CNG वाहन सबसे सस्ता और सुविधाजनक विकल्प माने जाते हैं। लेकिन लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों के कारण अब यह विकल्प भी महंगा होता जा रहा है। कई ऑटो चालकों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो उन्हें या तो किराए में बढ़ोतरी करनी पड़ेगी या फिर अपने दैनिक संचालन में कटौती करनी होगी, जिसका सीधा असर यात्रियों पर पड़ेगा।

शहर के विभिन्न रूटों पर चलने वाले ऑटो चालकों के बीच इस बढ़ोतरी को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि पहले से ही ट्रैफिक जाम, बढ़ती मेंटेनेंस लागत और कम किराए की वजह से उनकी आमदनी सीमित है। ऐसे में ईंधन की कीमत में हर छोटी बढ़ोतरी भी उनके दैनिक बजट को प्रभावित करती है। कई चालकों ने यह भी आशंका जताई है कि यदि कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं तो उन्हें वैकल्पिक रोजगार पर विचार करना पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि CNG की कीमतों में वृद्धि का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका असर पूरे शहरी परिवहन तंत्र पर पड़ता है। जब ईंधन महंगा होता है तो परिवहन लागत बढ़ती है, और अंततः इसका बोझ आम उपभोक्ता तक पहुंचता है। पटना जैसे शहर में, जहां बड़ी आबादी दैनिक आवागमन के लिए सार्वजनिक परिवहन पर निर्भर है, वहां यह असर और अधिक गहरा हो जाता है।

इस बीच शहर के कई इलाकों में यात्रियों ने भी चिंता जताई है कि यदि ऑटो और टैक्सी चालक किराया बढ़ाते हैं तो उनके दैनिक खर्चों में भी बढ़ोतरी होगी। खासकर नौकरीपेशा और छात्र वर्ग पर इसका सीधा असर पड़ेगा, जो रोजाना सस्ते परिवहन विकल्पों पर निर्भर रहते हैं। पहले से ही बढ़ती महंगाई के बीच यह एक अतिरिक्त बोझ साबित हो सकता है।

ईंधन कीमतों में लगातार हो रहे बदलाव को लेकर राजनीतिक स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है। विभिन्न संगठनों का कहना है कि सरकार को स्थिर मूल्य नीति अपनानी चाहिए ताकि आम जनता को बार-बार होने वाले उतार-चढ़ाव से राहत मिल सके। हालांकि प्रशासनिक स्तर पर इसे वैश्विक बाजार और आपूर्ति व्यवस्था से जुड़ा विषय बताया जा रहा है।

फिलहाल पटना में स्थिति यह है कि CNG की नई दर लागू होने के बाद वाहन चालकों और यात्रियों दोनों के बीच असमंजस का माहौल है। आने वाले दिनों में यदि कीमतों में और बढ़ोतरी होती है तो शहर में परिवहन व्यवस्था पर और अधिक दबाव देखा जा सकता है। साथ ही ऑटो यूनियनों द्वारा किराया संशोधन की मांग भी तेज होने की संभावना है, जिससे आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ सकता है।

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